शुरुआती
अंदर सूजन, शौच के समय बिना दर्द के चमकीला लाल खून। मस्सा बाहर नहीं आता।
इलाज: खान-पान, फ़ाइबर और दवा
डॉक्टर्स डिवाइन में Dr. Ranvijay Bharti द्वारा लेज़र हेमोरॉयडोप्लास्टी (LHP)। बिना चीरा, बहुत कम दर्द, उसी दिन छुट्टी।

शुरुआत में बवासीर दवा और खान-पान से भी ठीक हो सकती है। खून आए तो डॉक्टर से ज़रूर जाँच कराएँ।
आज ही डॉक्टर से मिलेंसही ग्रेड से तय होता है कि दवा काफ़ी है या लेज़र सर्जरी चाहिए।
अंदर सूजन, शौच के समय बिना दर्द के चमकीला लाल खून। मस्सा बाहर नहीं आता।
इलाज: खान-पान, फ़ाइबर और दवा
शौच के समय मस्सा बाहर आता है और अपने आप अंदर चला जाता है। खून और खुजली।
इलाज: लेज़र (LHP) या दवा
शौच के समय मस्सा बाहर आता है और उँगली से अंदर करना पड़ता है।
इलाज: लेज़र (LHP) की सलाह
मस्सा हमेशा बाहर रहता है और अंदर नहीं जाता। दर्द, खून के थक्के और स्राव।
इलाज: लेज़र सर्जरी या मिली-जुली प्रक्रिया
| लेज़र (LHP) · डॉक्टर्स डिवाइन | पुराना ऑपरेशन | |
|---|---|---|
| चीरा | कोई खुला घाव नहीं; लेज़र फ़ाइबर बहुत छोटे छेद से जाता है | सर्जरी का चीरा |
| बाद में दर्द | 1–2 दिन हल्का दर्द | कई दिन ज़्यादा दर्द |
| खून | बहुत कम; लेज़र नसों को बंद कर देता है | ज़्यादा खून |
| अस्पताल में रुकना | डे-केयर, 4–8 घंटे में घर | 2–4 दिन |
| काम पर वापसी | 2–4 दिन |
नवादा, वारिसलीगंज, हिसुआ, रजौली और पकरीबरावाँ के मरीज़ डॉक्टर्स डिवाइन क्यों चुनते हैं।
मलाशय के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ने से बवासीर होती है। पुरानी कब्ज़, शौच के समय ज़्यादा ज़ोर लगाना, शौचालय में देर तक बैठना, गर्भावस्था, मोटापा और कम फ़ाइबर वाला खाना इसके आम कारण हैं।
ग्रेड I: अंदर छोटी सूजन जिससे खून आता है पर मस्सा बाहर नहीं आता। ग्रेड II: शौच के समय बाहर आता है और अपने आप अंदर चला जाता है। ग्रेड III: बाहर आता है और हाथ से अंदर करना पड़ता है। ग्रेड IV: हमेशा बाहर रहता है और अंदर नहीं जाता।
शुरुआती बवासीर (ग्रेड I और हल्की ग्रेड II) अक्सर फ़ाइबर वाले खाने, भरपूर पानी, मल नरम करने वाली दवा और इलाज से संभल जाती है। बढ़ी हुई ग्रेड II, III और IV में आमतौर पर लंबे आराम के लिए लेज़र हेमोरॉयडोप्लास्टी जैसी प्रक्रिया की ज़रूरत होती है।
LHP में एक पतला लेज़र फ़ाइबर बवासीर के मस्से में डाला जाता है। लेज़र की ऊर्जा मस्से को खून पहुँचाने वाली नसों को सिकोड़ देती है, बिना अंदरूनी परत काटे, इसलिए मस्सा बिना खुले घाव के छोटा हो जाता है।
लेज़र सर्जरी कई बुज़ुर्गों और डायबिटीज़ या बीपी वाले मरीज़ों के लिए ठीक रहती है, क्योंकि इसमें खून बहुत कम निकलता है, लंबी गहरी बेहोशी नहीं चाहिए और मरीज़ जल्दी सामान्य दिनचर्या पर लौट आते हैं। डॉक्टर पहले आपकी पूरी सेहत जाँचकर फ़ैसला करते हैं।
फ़ाइबर वाला खाना: हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, ताज़े फल (पपीता, सेब), ओट्स, साबुत अनाज, और रोज़ कम से कम 3 से 4 लीटर पानी। मसालेदार खाना, तली चीज़ें, शराब और ज़्यादा चाय-कॉफ़ी से बचें।
डॉक्टर्स डिवाइन, नवीन नगर, नवादा · इमरजेंसी 24x7
| 3–4 हफ़्ते |